देहरादून : भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के उत्तराखंड दौरे से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ हुई हरिद्वार लोकसभा सांसद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व गढ़वाल लोकसभा सांसद भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी की मुलाकात काफी चर्चाओं में है। हालांकि इस बैठक में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट और महामंत्री संगठन अजय कुमार भी मौजूद थे। सवाल उठ रहा है कि क्या यह बैठक कोई सामान्य बैठक थी या राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से पहले संगठन की तरफ से कोई डैमेज कंट्रोल का प्रयास।
दरअसल ऐसा इसलिए माना जा रहा है कि भाजपा के वरिष्ठ विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडे के प्रकरण को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत व गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी खासे खफा बताए जा रहे हैं। बीते दिनों पहले गढ़वाल सांसद अनिल बलूनी की विधायक अरविंद पांडे से उनके आवास में लंबी मुलाकात भी हुई और उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत भी अरविंद पांडे के आवास में जाकर उनसे मिले। इस मुलाकात के बाद सांसद त्रिवेन्द्र रावत का एक बयान भी सामने आया था।
अब इस बात की आशंका भी जताई जा रही थी कि संभवत कोर ग्रुप की बैठक में दोनों दिग्गज सांसद कहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष व महामंत्री संगठन के सामने अपनी चिंता जाहिर कर सकते हैं। लिहाजा कोई जोखिम क्यों मोल लिया जाए, ज्यादा बेहतर है डैमेज से पहले ही कंट्रोल हो जाये। ये माना जा रहा है कि कोर ग्रुप की बैठक के अलावा भी राष्ट्रीय अध्यक्ष व राष्ट्रीय महामंत्री सांसदों से मुलाकात कर फीडबैक ले सकते हैं।
हालांकि दोनों ही सांसदों ने सोशल मीडिया के जरिए साझा जानकारी में मुलाकात को राष्ट्रीय अध्यक्ष के दौरे से जोड़ते हुए एक सांगठनिक बैठक करार दिया जो मूल रूप से कार्यक्रम व व्यवस्थाओं से जुड़ी बताई गई। हालांकि बंद कमरे की बैठक के राज तो फिलहाल पर्देदारी में ही नज़र आते हैं और फिलहाल इस संबंध में कोई प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
लेकिन सियासी गलियारों में तो इसे सामान्य बैठक के तौर पर नहीं देखा जा रहा। दरअसल राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर अक्सर पूर्व मुख्यमंत्री व सांसद त्रिवेन्द्र रावत की बेबाक प्रतिक्रिया सामने आती रहती है। विधायक अरविंद पांडे के प्रकरण में भी उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है। ऐसे में खास मुलाकात के भले ही कई सियासी मायने निकाले जा रहे हों लेकिन सवाल ये भी उठना लाजिमी है कि अंदरखाने क्या भाजपा में सब कुछ “आल की वेल” चल रहा है।




