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औषधीय पौधों के क्षेत्र में उत्तराखंड को मिल रही नई पहचान, औषधीय पौधों के विकास और खेती के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति दर्ज करवा रहा उत्तराखंड, राज्य में 26 परियोजनाओं के लिए स्वीकृत की गई 700.21 लाख की धनराशि

देहरादून / नई दिल्ली : हरिद्वार लोकसभा सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में उठाए गए प्रश्न के उत्तर में आयुष मंत्रालय ने देश में औषधीय पौधों के संरक्षण, विकास एवं खेती को बढ़ावा देने हेतु चल रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी साझा की है। आयुष मंत्रालय में राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने

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तकनीकी शिक्षा के विस्तार को खुलेंगे 8 नये पाॅलीटेक्निक काॅलेज, विभाग में लम्बे समय से रिक्त व पदोन्नति के पद भरेंगे, विभागीय अधिकारियों को दिये निर्देश, निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का रखें ध्यान

देहरादून : तकनीकी शिक्षा के विस्तार को प्रदेश में आठ नये पाॅलीटेक्निक काॅलेजों की स्थापना की जायेगी। साथ ही विश्वविद्यालय के समस्त कैम्पस काॅलेजों एवं पाॅलीटेक्निक संस्थानों में लम्बे समय से रिक्त शैक्षणिक एवं शिक्षणेत्तर पदों पर स्थाई नियुक्ति की जायेगी। इसके अलावा तकनीकी शिक्षा विभाग में पदोन्नति एवं विभिन्न संवर्ग के रिक्त पदों को भरना प्राथमिकता में रहेगा। विभाग

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MDDA का सख्त एक्शन, अवैध निर्माणों पर एमडीडीए की ताबड़तोड़ सीलिंग, प्राधिकरण क्षेत्र में विभिन्न स्थानों पर सीलिंग, नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई

देहरादून : मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) द्वारा प्राधिकरण क्षेत्र में अवैध निर्माणों के खिलाफ सख्त अभियान चलाते हुए विभिन्न स्थानों पर सीलिंग की कार्रवाई की गई। यह कार्रवाई प्राधिकरण के नियमों के उल्लंघन को रोकने और नियोजित विकास को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है। एमडीडीए द्वारा स्पष्ट किया गया है कि बिना स्वीकृति के किसी

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कर्नल अजय कोठियाल का सराहनीय कदम , बतौर दायित्वधारी नहीं लेंगे सरकारी सुविधा

उत्तराखंड राज्य पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष कर्नल अजय कोठियाल

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महेन्द्र भट्ट का डबल धमाका फिर बने संगठन के सरताज , बोले 27 में लगाएंगे जीत की हैट्रिक , अबकी बार 60 पार

मंगलवार का दिन महेन्द्र भट्ट के लिए मंगलमय रहा। कुशल सांगठनिक नेतृत्व

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देवभूमि विकास संस्थान की सराहनीय पहल, सात जन्मों के बंधन को और मजबूती से जोड़े रखने पर हुआ मंथन, टूटते वैवाहिक रिश्तों को बिखरने से बचाने के उपाय पर चिंतन, गंगधारा -2.0 में प्री वेडिंग काउंसलिंग की जरूरत पर एकमत विशेषज्ञ व प्रतिभागियों ने किया संवाद। संस्कृति, समझ और संवाद से रुकेगा रिश्तों में बिखराव : त्रिवेन्द्र

देहरादून : विवाह सात जन्मों का वो पवित्र बंधन है जो रिश्तों की मजबूत डोर से बंधा रहता है और इस रिश्ते को बनाये रखने की जिम्मेदारी दोनों पर होती है। लेकिन अक्सर कभी कभी ऐसे हालात भी बन जाते है जब ये मजबूत डोर इतनी कमजोर पड़ जाती है कि वैवाहिक रिश्ते टूटने की कगार पर आ जाते हैं। ऐसे में कैसे इन रिश्तों की डोर को मजबूत रखा जा सकता है इस दिशा में देवभूमि विकास संस्थान की तरफ से एक पहल की गई है। टूटते वैवाहिक रिश्ते को टूटने से बचाने के लिए प्री वेडिंग कॉउंसलिंग कितनी मददगार हो सकती है आज ये बहुत अहम विषय है। इसी विषय पर शनिवार को देवभूमि विकास संस्थान की ओर से गंगधारा-2.0 के मंच के जरिये टूटते वैवाहिक रिश्तों और इसकी रोकथाम के लिए प्री -वेडिंग काउंसलिंग की आवश्यकता पर खुलकर बात हुई। एक तरफ विभिन्न विषयों के विशेषज्ञ थे, दूसरी तरफ प्रतिभागी। विवाह जैसी पवित्र और जिम्मेदारी भरे रिश्ते की मजबूती के लिए गंगधारा 2.0 के मंच पर खूब चर्चा हुई। विशेषज्ञों और प्रतिभागियों ने अपनी अपनी बात रखी और महसूस किया कि रिश्ते को टूटने से बचाने के लिए तीन मूल मन्त्रों पर काम करना बेहद जरूरी है। ये मूल मंत्र हैं संस्कृति, समझ और संवाद। देवभूमि विकास संस्थान और दून विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम की थीम प्री-वेडिंग काउंसलिंग-समझ और संवाद के उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश यूसी ध्यानी ने कहा कि प्री-वैडिंग काउंसिलिंग एक अहम विषय है, जो आज के समय की आवश्यकता बन गया है। उन्होंने कहा कि वैवाहिक संबंधों को लेकर कई कानूनी प्रावधान है, लेकिन वह संपूर्ण समाधान नहीं हैं। रिश्तों की मजबूती इसी से संभव है कि अपने सांस्कृतिक मूल्यों पर चलते हुए समन्वय स्थापित किया जाए। इस मौके पर देवभूमि विकास संस्थान के संरक्षक और हरिद्वार सांसद पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि हम उस संस्कृति के संवाहक हैं, जो समन्वय सिखाती है। आज समाज के रिश्तों में दरारें बढ़ रही हैं। ऐसे में आवश्यकता है कि हम अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़कर रिश्तों की मजबूती के लिए कार्य करें। उन्होंने युवाओं की जेन जी, एल्फा कैटेगरी का जिक्र करते हुए कहा कि पीढ़ियों के बीच फासला बढ़ता जा रहा है। एक बेहतर स्थिति बनाने के लिए युवाओं की सहभागिता जरूरी है। कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो दीवान सिंह बिष्ट ने कहा कि भारत जैसे देश में कभी भी विवाह से पूर्व परामर्श की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन बदलते समय में यह जरूरी नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि परिवार में जब 'हम' की जगह 'मै' ले लेगा, तो फिर दिक्कतें आएंगी। दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो सुरेखा डंगवाल ने कहा कि परिवार हमारी ताकत रहा है, लेकिन बदलते दौर मेें चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। उन्होंने प्री-वैडिंग काउंसलिंग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाए जाने की वकालत की। सत्र की अध्यक्षता उत्तरांचल लॉ कॉलेज के प्राचार्य प्रो राजेश बहुगुणा ने की। संचालन दून विश्वविद्यालय के प्रो एचसी पुरोहित ने किया। मुख्य अतिथि स्वामी राम हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो विजय धस्माना ने वैवाहिक संबंधों की मजबूती की बात को अपने माता-पिता का उदाहरण देते हुए समझाया। उन्होंने कहा कि उनके माता-पिता की आयु में 11 वर्ष का अंतर था। विचार भी नहीं मिलते थे। यहां तक की दोनों ने शादी से पहले एक-दूसरे को देखा भी नहीं था, लेकिन समन्वय, समर्पण की वे मिसाल बने और एक सफल पारिवारिक जीवन व्यतीत किया। कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञों और प्रतिभागियों के बीच संवाद में महत्वपूर्ण विमर्श हुआ। विभिन्न काॅलेजों के विद्यार्थियों ने संवाद के इस कार्यक्रम में उत्साहपूर्वक भाग लिया और विषय विशेषज्ञों से सवाल पूछे। संवाद के इस कार्यक्रम में मनोवैज्ञानिक डा आशुतोष श्रीवास्तव, डा विक्रम रावत, अमन कपूर, डा मालिनी श्रीवास्तव, एडवोकेट रवि नेगी और सहकारिता विभाग की महाप्रबंधक रामेंद्री मंद्रवाल ने भाग लिया। छात्रों के सवालों के जवाब देते हुए विषय विशेषज्ञों ने कहा कि विवाह जैसे पवित्र रिश्ते में जब अधिकारों की बात होने लगेगी, तो मुश्किलें पेश आना तय है। हमारे समाज में विवाह में कभी अधिकारों की बात शामिल नहीं थी, बल्कि कर्तव्यों को प्राथमिकता में रखते हुए लोगों ने सफल वैवाहिक जीवन जिया। विवाह हो या कोई भी संस्था, वे कर्तव्यों से ही चलती हैं। उन्होंने कहा कि प्री-वैडिंग काउंसलिंग की आवश्यकता इसलिए भी है कि हम विवाह बंधन में बंधने से पहले अपनी अपेक्षाओं का निर्धारण कर लें। प्री-वेडिंग काउंसलिंग पर आयोजित इस व्याख्यानमाला में चिपको आंदोलन की प्रणेता स्वर्गीय गौरा देवी और जनजाति दिवस की छाप भी रही। स्वर्गीय गौरा देवी के शताब्दी वर्ष पर उन्हें नमन करते हुए श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम स्थल पर गौरा देवी के पोस्टर और पर्यावरण संरक्षण के पोस्टर-बैनर लगाए गए थे। इसी तरह जनजाति दिवस मनाते हुए डीएवी पब्लिक स्कूल डिफेंस कालोनी के बच्चों ने उत्तराखंड की जनजातियों पर केंद्रित आकर्षक प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में लंबा सफल वैवाहिक जीवन पूरा करने वाले पांच आदर्श युगल और उनके परिवारों को सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राकेश ओबराय, वीरेंद्र सिंह कृषाली, जगमोहन सिंह राणा, मनोहर सिंह रावत और खुशहाल सिंह पुंडीर शामिल थे। इस दौरान अतिथियों ने दो पुस्तकों का विमोचन भी किया। गंगधारा-संस्कृति से सतत विकास पुस्तक प्रो सुरेखा डंगवाल और प्रो सुधांशु जोशी ने लिखी है। प्री-वैडिंग काउंसिलिंग पर आधारित प्रो राजेश भट्ट की लिखी पुस्तक का भी इस मौके पर विमोचन किया गया। देवभूमि विकास संस्थान की मेन ट्रस्टी कृति रावत ने विभिन्न वर्गों के बीच किए गए सर्वे की रिपोर्ट साझा की। कार्यक्रम में विधायक उमेश शर्मा काऊ,, विधायक विनोद चमोली, विधायक बृजभूषण गैरोला और विधायक सविता कपूर, संस्कृति, साहित्य व कला परिषद की उपाध्यक्ष मधु भट्ट, देहरादून के पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा, देवभूमि विकास संस्थान की मेन ट्रस्टी कृति रावत, महासचिव सतेंद्र नेगी, कोषाध्यक्ष उमेश्वर रावत, डॉ. दीपक भट्ट, प्रमोद रावत आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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बोले शिक्षा मंत्री डॉ धन सिंह रावत उत्तराखंड में चार सालों में और सुदृढ़ हुई शिक्षा व्यवस्था, धरातल पर उतरी योजनाएं तो छात्रों के सपनों को लगे पंख

देहरादून : सरकार के चार सालों का कार्यकाल हो गया है। शिक्षामंत्री डॉ धन सिंह रावत ने चार सालों में शिक्षा विभाग में किये गए कार्यों का ब्यौरा साझा किया

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