देहरादून : मसूरी विधानसभा सीट से विधायक और धामी कैबिनेट में मंत्री गणेश जोशी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गयी है। देहरादून शहर के पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने मसूरी विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी जताई है। सुनील उनियाल गामा ने बड़ी ही मजबूती के साथ अपनी दावेदारी की ताल ठोकी है। “गामा” के ताल ठोकने से मंत्री गणेश जोशी के कैम्प में हलचल होनी लाजमी है, हालांकि अभी तक उनकी कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। लेकिन इतना जरूर है कि जिस तरीके से पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा ने मसूरी विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी जताई है उसे हल्के में नहीं लिया जा सकता है। सोशल मीडिया में चल रहे पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा के बयान से समझा जा सकता है कि इस बार मंत्री गणेश जोशी को टिकट के लिए बड़ी टक्कर मिलने वाली है और सुनील उनियाल गामा मंत्री गणेश जोशी को इस बार आसानी से टिकट नहीं लेने देंगे। पूर्व मेयर का साफ कहना है कि भाजपा जिसे टिकट देगी वह जीतेगा।
दरअसल सुनील उनियाल गामा की दावेदारी के सियासी समीकरणों को समझें तो भले ही मंत्री गणेश जोशी एक मजबूत चेहरा हों लेकिन पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा की दावेदारी को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता है। देहरादून शहर का मेयर रह चुके सुनील उनियाल गामा भी एक चिरपरिचित चेहरा हैं और अपनी पहचान भी रखते हैं। संघ-संगठन से वे जुड़े रहे हैं। दूसरा बड़ा फैक्टर ये भी है कि पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा भाजपा के पुराने कार्यकर्ता होने के साथ ही पूर्व सीएम व मौजूदा भाजपा सांसद त्रिवेंद्र रावत के काफी करीबी में गिने जाते हैं। पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र रावत के मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही सुनील उनियाल गामा देहरादून शहर के मेयर बने थे। ऐसे में उनकी दावेदारी को और वजन भी मिलता है।
हालांकि अभी चुनाव में वक्त है लेकिन पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा की दावेदारी ने भाजपा की अंदरूनी राजनीति में हलचल जरूर पैदा कर दी है और सियासी गलियारों में चर्चा का बाजार भी गरमा दिया है। शायद ऐसा पहली बार होगा जब मंत्री गणेश जोशी के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी नज़र आ रही है। लाजमी है कि सुनील उनियाल गामा की दावेदारी से मसूरी विधानसभा क्षेत्र में एक नया सियासी समीकरण जरूर बनेगा। मसूरी विधानसभा क्षेत्र से मौजूदा विधायक मंत्री गणेश जोशी को पूर्व मेयर सुनील उनियाल गामा की दावेदारी कितनी भारी पड़ती हैं ये तो आने वाले वक्त में ही पता चलेगा लेकिन इतना जरूर है सियासी फिजाओं में ये चर्चा का विषय जरूर बन गया है।




