देहरादून : भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूरी का निधन हो गया। काफी समय से वे अस्वस्थ चल रहे थे और अस्पताल में भर्ती थे। आज देहरादून के मैक्स अस्पताल में उनका निधन हो गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत भाजपा नेताओं ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया है।
मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खण्डूरी, AVSM का जन्म
जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था। मेजर जनरल (रि.) भुवन चंद्र खण्डूरी उत्तराखंड और देश की राजनीति में ईमानदारी, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के प्रतीक माने जाते थे। उन्होंने भारतीय सेना की कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स में वर्ष 1954 से 1991 तक सेवा दी। सेना में रहते हुए उन्होंने देश के लिए तीन जंग लड़ी और अपने उत्कृष्ट योगदान के लिए अति विशिष्ट सेवा मेडल (AVSM) से सम्मानित हुए। सेना से मेजर जनरल के पद पर सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया और गढ़वाल से कई बार सांसद चुने गए।
वे भारत सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहे व उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकालों में सेवा दी। उनका राजनीतिक जीवन सादगी, पारदर्शिता और सुशासन के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। उनके द्वारा किए गए महत्वपूर्ण कार्यों में गोल्डन क्वाड्रिलेटरल एवं राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजना को गति देकर देश की सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने उत्तराखंड में मजबूत लोकायुक्त व्यवस्था और भ्रष्टाचार विरोधी पहल को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री रहते हुए प्रशासनिक सादगी, पारदर्शिता और जनकेंद्रित शासन को प्राथमिकता दी। सैनिक अनुशासन और राष्ट्रहित को सार्वजनिक जीवन में उतारने वाले नेतृत्वकर्ता के रूप में पहचान बनाई। मेजर जनरल (सेवानिवृत) बी.सी. खण्डूरी का जीवन सेना से राजनीति तक राष्ट्र और समाज की निस्वार्थ सेवा को समर्पित रहा। उनका निधन उत्तराखंड और देश के सार्वजनिक जीवन के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जाएगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं वरिष्ठ नेता मेजर जनरल भुवन चंद्र खण्डूरी (सेवानिवृत्त) के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व सीएम भुवन चंद्र खण्डूरी जी ने भारतीय सेना में रहते हुए राष्ट्र सेवा, अनुशासन एवं समर्पण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया। सार्वजनिक जीवन में भी उन्होंने उत्तराखंड के विकास, सुशासन, पारदर्शिता और ईमानदार कार्यशैली की मजबूत पहचान बनाई। उन्होंने प्रदेशहित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लेकर विकास को नई दिशा प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खण्डूरी जी की सादगी, स्पष्टवादिता एवं कार्यकुशलता सदैव प्रेरणास्रोत रहेगी। उनका निधन उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने ईश्वर से पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान व शोक संतप्त परिजनों एवं समर्थकों को यह असीम दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है।




