देहरादून : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन किया। इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के बनने के बाद अब देहरादून से दिल्ली पहुंचना बेहद आसान हो गया है। इससे दिल्ली-देहरादून की दूरी 213 किलोमीटर रह गयी है जो कि करीब 22 किलोमीटर घट गई है। 6 लेन एक्सप्रेसवे के बनने के बाद अब देहरादून से दिल्ली महज 2 से 2:30 घंटे में बीच में पहुंचा जा सकता है। गढ़वाल लोकसभा सांसद अनिल बलूनी ने स्वयं इस हाइवे पर सफर कर सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा की। सांसद अनिल बलूनी 5:15 मिनट पर देहरादून से दिल्ली के लिए निकले और ठीक 7:35 मिनट पर दिल्ली पहुंचे। यानी की महज 2 घंटा 20 मिनट में सांसद अनिल बलूनी दिल्ली पहुंच गए। देहरादून से दिल्ली की जो दूरी तय करने में पहले 6 से 7 घंटे का वक्त लग जाता था इस इकोनॉमिक कॉरिडोर के बनने के बाद वो दूरी महज 2 से ढाई घंटे तक आ सिमटी है। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि अब दिल्ली दूर नहीं रही।
सांसद अनिल बलूनी बोले सपने नहीं हकीकत बुनते हैं इसीलिए लोग मोदी को चुनते हैं
सही मायनों में देखा जाय तो पहले जो कल्पना की जाती थी अब वो हकीकत बन चुकी है। दिल्ली-देहरादून इकोनामिक कॉरिडोर बनने के बाद से अब दिल्ली दूर नहीं रही बल्कि दिल्ली का सफर अब बहुत आसान हो गया है। सिर्फ सफर ही आसान नहीं हुआ है बल्कि उत्तराखण्ड के आर्थिक विकास और तरक्की के द्वार भी खुल गए हैं। साफ है इसका फायदा उत्तराखंड को आने वाले वक्त में दिखाई पड़ेगा। ये महज एक एक्सप्रेसवे नहीं बल्कि उत्तराखंड की आर्थिकी का एक्सप्रेसवे साबित होगा जिसके जरिए उत्तराखंड में पर्यटन से लेकर आर्थिक व व्यावसायिक गतिविधियों और बढ़ेंगी। करीब 12,000 करोड़ की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे से सफर भी आसान होगा और लोगों का समय भी बचेगा। सांसद अनिल बलूनी ने सफर के अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए कहा कि सपने नहीं हकीकत बुनते हैं इसीलिए लोग मोदी को चुनते हैं।
पहाड़ पर रेल का सपना भी हो रहा पूरा , गढ़वाल क्षेत्र को पीएम की बड़ी सौगात
उत्तराखंड में पहाड़ पर ट्रेन चढ़ाना पहले एक सपने सा लगता था लेकिन पीएम मोदी ने इसे हकीकत में बदल दिया। ऋषिकेश से कर्णप्रयाग रेल लाइन पर बड़ी ही तेजी के साथ काम चल रहा है। उम्मीद की जा रही है कि काम की रफ्तार सही रही तो जल्द ही पहाड़ के लोग ट्रेन के जरिये ऋषिकेश से कर्णप्रयाग का सफर करेंगे। गढ़वाल क्षेत्र के लिए यह लाइफ लाइन से कम साबित नहीं होगी। इसके जरिए जहां एक तरफ गढ़वाल क्षेत्र में कनेक्टिविटी बढ़ेगी और कनेक्टिविटी बढ़ने से पर्यटकों व यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो वही रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे और उसका पूरा फायदा पहाड़ के लोगों को मिलेगा।




