देहरादून / नई दिल्ली : हरिद्वार लोकसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए संचालित पोस्ट-मैट्रिक एवं प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन,लाभार्थियों की संख्या, निधि आवंटन, आवेदन प्रक्रिया तथा निगरानी व्यवस्था को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया।
अपने प्रश्न के माध्यम से सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने उत्तराखंड सहित विभिन्न राज्यों में छात्रवृत्ति योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों, लाभार्थियों, निधि आवंटन, उपयोगिता, आवेदन स्वीकृति-अस्वीकृति तथा पारदर्शी निगरानी प्रणाली की विस्तृत जानकारी मांगी।
इस पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति तथा प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली के माध्यम से कर रही है। इससे छात्रवृत्ति की राशि सीधे पात्र विद्यार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में पहुंच रही है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगी है।
उन्होंने बताया कि योजनाओं में समयबद्ध भुगतान, जवाबदेही और तकनीक आधारित निगरानी सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) के माध्यम से आवेदन, सत्यापन एवं भुगतान की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाया गया है। योजनाएं मांग आधारित हैं तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों की वार्षिक कार्ययोजना के आधार पर केंद्र सरकार अपना अंश जारी करती है।
केंद्रीय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने सदन को अवगत कराया कि वर्ष 2025-26 में देशभर में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 47.53 लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 26.79 लाख से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है।
उत्तराखंड को भी इन योजनाओं का उल्लेखनीय लाभ प्राप्त हुआ है। वर्ष 2025-26 में राज्य में पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 26 हजार से अधिक विद्यार्थियों तथा प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 10 हजार से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिला है।
इस अवसर पर सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार शिक्षा को सामाजिक सशक्तिकरण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए यह सुनिश्चित कर रही है कि आर्थिक अभाव किसी भी प्रतिभाशाली विद्यार्थी की शिक्षा में बाधा न बने। उन्होंने कहा कि डीबीटी, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल और पारदर्शी निगरानी व्यवस्था ने छात्रवृत्ति वितरण प्रणाली को अधिक विश्वसनीय, जवाबदेह और प्रभावी बनाया है। इससे देशभर के लाखों विद्यार्थियों, विशेषकर उत्तराखंड के पात्र छात्रों को समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से लाभ मिल रहा है।

