देहरादून : हरिद्वार सांसद एवं उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने लोक भवन, देहरादून में उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह से शिष्टाचार भेंट की।
भेंट के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में उपलब्ध पिरूल, गोबर एवं अन्य जैविक संसाधनों के वैज्ञानिक एवं तकनीकी उपयोग को लेकर विस्तृत विचार-विमर्श हुआ। इन स्थानीय संसाधनों को मूल्यवर्धित उत्पादों, ऊर्जा उत्पादन तथा आजीविका के नए अवसरों से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।
पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में प्राकृतिक एवं स्थानीय संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और उनका वैज्ञानिक उपयोग रोजगार सृजन, स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता तथा पलायन की चुनौती को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। पिरूल और गोबर जैसे संसाधन, जिन्हें अक्सर अपशिष्ट के रूप में देखा जाता है, तकनीक और नवाचार के माध्यम से ग्रामीण आय के महत्वपूर्ण स्रोत बन सकते हैं।
हरिद्वार लोकसभा सांसद ने कहा कि विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, तकनीकी विशेषज्ञों तथा नवाचार आधारित संस्थाओं को स्थानीय संसाधनों के उपयोग से जुड़ी संभावनाओं को धरातल पर उतारने के लिए और अधिक सक्रियता से कार्य करना चाहिए। स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तकनीकी समाधान विकसित कर इन्हें ग्राम स्तर तक पहुंचाने से ग्रामीण क्षेत्रों में नए आर्थिक अवसर पैदा किए जा सकते हैं।
सांसद त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के संकल्प के अनुरूप उत्तराखंड के गांवों को स्थानीय संसाधनों, स्थानीय प्रतिभा और स्थानीय उद्यमिता के आधार पर मजबूत बनाना समय की आवश्यकता है। संसाधन से समृद्धि और गांव से आत्मनिर्भरता की दिशा में ऐसे प्रयास उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई पहचान देने में महत्वपूर्ण सिद्ध होंगे।
उन्होंने कहा कि स्थानीय संसाधनों का मूल्यवर्धन, तकनीकी नवाचार और ग्रामीण आजीविका के विस्तार के माध्यम से उत्तराखंड के गांवों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना तथा विकास की मुख्यधारा से और मजबूती से जोड़ना ही हमारा प्रमुख उद्देश्य होना चाहिए।

