देहरादून/नई दिल्ली : सांसद हरिद्वार एवं पूर्व मुख्यमंत्री उत्तराखंड त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने संसद में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री से मानव जीवन के लिए खतरा बने वन्यजीवों से मानव जीवन की सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा संचालित विशेष योजनाओं एवं कार्ययोजनाओं के बारे में प्रश्न पूछा। उन्होंने इस दिशा में किए जा रहे उपायों, पिछले दो वर्षों में जारी धनराशि, वन्यजीवों के प्रबंधन तथा मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के परिणामों का भी ब्यौरा मांगा।
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने अपने लिखित उत्तर में बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों की है। केंद्र सरकार केंद्र प्रायोजित समग्र योजना ‘वन्यजीव पर्यावासों का एकीकृत विकास’ के माध्यम से राज्यों को वित्तीय सहायता उपलब्ध करा रही है। इसके तहत संकटग्रस्त वन्यजीवों को पकड़ने एवं पुनर्वास, निगरानी, वन्यजीवों को दूर भगाने के उपाय, मानव जीवन एवं फसल-संपत्ति के नुकसान का मुआवजा, बीमा, जन-जागरूकता तथा वन विभाग के कर्मचारियों की क्षमता बढ़ाने जैसे कार्य किए जा रहे हैं। राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने बताया कि देशभर में ‘वन्यजीव पर्यावासों का विकास’ योजना के तहत वर्ष 2024-25 में ₹131.71 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹95.20 करोड़, कुल ₹226.90 करोड़ की धनराशि जारी की गई। वहीं, उत्तराखंड को इसी योजना के तहत दो वर्षों में ₹9.38 करोड़ की केंद्रीय सहायता मिली। इसमें वर्ष 2024-25 में ₹6.52 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹2.85 करोड़ शामिल हैं।
इसी प्रकार, ‘बाघ एवं हाथी परियोजना’ के तहत देशभर में वर्ष 2024-25 में ₹290 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹158.52 करोड़, कुल ₹448.52 करोड़ जारी किए गए। उत्तराखंड को इस योजना के तहत दो वर्षों में ₹25.04 करोड़ मिले, जिसमें वर्ष 2024-25 में ₹18.23 करोड़ और वर्ष 2025-26 में ₹6.81 करोड़ शामिल हैं। इस प्रकार, इन दोनों योजनाओं के तहत देशभर में दो वर्षों में लगभग ₹675.42 करोड़, जबकि उत्तराखंड को लगभग ₹34.42 करोड़ की केंद्रीय सहायता उपलब्ध कराई गई है।
सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय और वनबहुल राज्य में मानव-वन्यजीव संघर्ष ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन, आजीविका और सुरक्षा से सीधे जुड़ा विषय है। राज्य के पर्वतीय क्षेत्रों में तेंदुए, बाघ एवं अन्य वन्यजीवों की गतिविधियों के कारण ग्रामीणों को कई बार गंभीर परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार से मिलने वाली वित्तीय सहायता वन्यजीवों की निगरानी एवं प्रबंधन, संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, वन विभाग की क्षमता बढ़ाने और प्रभावित परिवारों को राहत उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष के समाधान के लिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक एवं तकनीक आधारित उपायों को और मजबूत किया जाना आवश्यक है। वन क्षेत्रों के आसपास रहने वाली आबादी की सुरक्षा, समय पर सूचना, प्रभावी निगरानी और संकटग्रस्त वन्यजीवों के उचित प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और वन्यजीवों का संरक्षण दोनों हमारी जिम्मेदारी हैं। मानव और वन्यजीवों के बीच संतुलित सह-अस्तित्व के लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों को मिलकर निरंतर प्रभावी प्रयास करने होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार से मिल रही सहायता उत्तराखंड में इस दिशा में किए जा रहे प्रयासों को और मजबूती प्रदान कर रही है।

