देहरादून : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दून विश्वविद्यालय परिसर में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र के सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत व विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों के साथ वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण एवं हरित भविष्य का संदेश दिया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न प्रजातियों के पौधे रोपित किए गए तथा पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने हेतु संगोष्ठी का भी आयोजन किया गया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिवस विशेष का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का सतत दायित्व है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, स्वच्छता एवं सतत विकास के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण पहल कर रहा है। आज जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण एवं प्राकृतिक संसाधनों के क्षरण जैसी चुनौतियां संपूर्ण मानवता के सामने गंभीर संकट के रूप में खड़ी हैं, जिनका समाधान केवल जनभागीदारी और सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।
उन्होंने कहा कि हमें अपने दैनिक जीवन में पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार का हिस्सा बनाना होगा। वृक्षारोपण, जल संरक्षण, प्लास्टिक के उपयोग में कमी, कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन एवं स्वच्छता जैसे प्रयासों को जन आंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। उन्होंने कचरा प्रबंधन के वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने तथा पर्यावरणीय जागरूकता अभियानों को गांव-गांव और जन-जन तक पहुंचाने पर बल दिया।
सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना ही मानव जीवन की स्थिरता और समृद्धि का आधार है। पर्यावरण संरक्षण ही जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने तथा बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने सभी नागरिकों से अधिकाधिक वृक्षारोपण करने तथा उनकी देखभाल सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
सभा को संबोधित करते हुए दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का स्कूल ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचुरल रिसोर्सेज तथा डॉ. नित्यानंद हिमालयन शोध एवं अध्ययन केंद्र पर्यावरणीय विषयों पर गंभीर शोध एवं समाजोपयोगी शोध कार्य संचालित कर रहे हैं। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग, हिमालयी पारिस्थितिकी एवं पर्यावरणीय चुनौतियों से जुड़े विषयों पर विश्वविद्यालय के विद्यार्थी एवं शिक्षक निरंतर अध्ययन और अनुसंधान में जुटे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल अकादमिक उत्कृष्टता तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज और मानवता के समक्ष उपस्थित चुनौतियों के समाधान में भी सक्रिय योगदान देना है। पर्यावरण संरक्षण एवं सतत विकास से जुड़े शोध कार्य आने वाले समय में और अधिक व्यापक होंगे, जिससे समाज को व्यावहारिक एवं दीर्घकालिक लाभ प्राप्त होगा।
कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रो. एच.सी. पुरोहित द्वारा किया गया। उन्होंने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों का कार्यक्रम में सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलसचिव दुर्गेश डिमरी, प्रो. आर.पी. मंगाई, प्रो. कुसुम अरुणाचलम्, प्रो. हर्ष डोभाल, प्रो. चेतना पोखरियाल, एस.एस. सुथार, लच्छीवाला रेंज अधिकारी सुश्री मेधावी, केदारपुरम पार्षद रोशन लाल बिंजोला, डॉ. राजेश, डॉ. विजय श्रीधर, प्रो. रीना सिंह, डॉ. विपिन सैनी, डॉ. अर्चना शर्मा, डॉ. प्राची पाठक, डॉ. चंद्रिका, डॉ. अचलेश डावरे सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक, कर्मचारी एवं पर्यावरण प्रेमी उपस्थित रहे।




