देहरादून / नई दिल्ली : हरिद्वार लोकसभा सांसद एंव उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा संसद में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया है कि चिकित्सा एवं शैक्षिक पुस्तकों पर जीएसटी लगाए जाने से छात्रों पर अतिरिक्त बोझ पड़ने संबंधी विषय पर सरकार की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट है।
उन्होंने बताया कि जीएसटी दरें एवं छूटें जीएसटी परिषद की सिफारिशों के आधार पर निर्धारित की जाती हैं। जीएसटी परिषद एक संवैधानिक निकाय है, जिसमें केंद्र व सभी राज्य/केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में सभी मुद्रित पुस्तकें, जिनमें ब्रेल पुस्तकें भी शामिल हैं, जीएसटी से पूर्णतः मुक्त हैं। अतः चिकित्सा एवं शैक्षिक पुस्तकों पर जीएसटी लगाए जाने का प्रश्न ही नहीं उठता।
पंकज चौधरी ने बताया कि मुद्रित पुस्तकों पर पहले से ही जीएसटी में छूट प्रदान की गई है, इसलिए उन्हें जीएसटी से मुक्त करने या न्यूनतम स्लैब में रखने संबंधी किसी अतिरिक्त कार्रवाई की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने बताया कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थियों पर किसी भी प्रकार का अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े, इसके प्रति प्रतिबद्ध है और इस दिशा में आवश्यक नीतिगत प्रावधान पहले से लागू हैं।
सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि शिक्षा और चिकित्सा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों से जुड़े विद्यार्थियों और शिक्षार्थियों पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ना चाहिए। सरकार द्वारा यह स्पष्ट किया जाना कि मुद्रित पुस्तकों पर जीएसटी नहीं है, विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए आश्वस्तकारी है।
सांसद त्रिवेंद्र रावत ने कहा कि शिक्षा राष्ट्र निर्माण का आधार है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुलभ और किफायती रहे। यदि भविष्य में किसी भी प्रकार की व्यावहारिक कठिनाई सामने आती है, तो उसे संबंधित मंचों पर प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों की रक्षा और शिक्षा के क्षेत्र को सशक्त बनाने के लिए हम निरंतर प्रतिबद्ध हैं।




