देहरादून : हरिद्वार लोकसभा सांसद एवं पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बुधवार को वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून में आगामी पृथ्वी दिवस (22 अप्रैल) के अवसर पर हिमालयी क्षेत्र में आपदाओं एवं उनसे जुड़े वैज्ञानिक तथा समसामयिक विषयों पर आयोजित होने वाली एक दिवसीय कार्यशाला के संबंध में आयोजित बैठक में प्रतिभाग किया।
बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. विनीत गहलोत, वैज्ञानिक डॉ. दीपक भट्ट सहित अन्य विशेषज्ञों के साथ कार्यशाला की रूपरेखा, विषयवस्तु तथा हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं की चुनौतियों, उनके वैज्ञानिक अध्ययन, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और सतत विकास से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
इस अवसर पर सांसद त्रिवेन्द्र रावत ने कहा कि हिमालय केवल भौगोलिक संरचना नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की जीवनरेखा है। हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक शोध, आधुनिक तकनीक और स्थानीय अनुभवों के समन्वय से आपदाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में ठोस प्रयास आवश्यक हैं।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार के वैज्ञानिक संवाद और कार्यशालाएं नीति निर्माण, आपदा प्रबंधन की बेहतर रणनीतियों तथा हिमालयी क्षेत्र में सुरक्षित और सतत विकास के मार्ग को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। साथ ही उन्होंने इस पहल के लिए संस्थान के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के प्रयासों की सराहना की।




